प्रोस्टेटाईटिस की सम्पूर्ण जानकारी । Prostatitis in Hindi

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आज हम जानेंगे प्रोस्टेटाइटिस के बारे जिसमे प्रोस्टेट ग्रंथि में जलन और सूजन आ जाती है, और हम जानेगे प्रोस्टेट का अर्थ क्या होता है? प्रोस्टेटाइटिस कितने प्रकार का होता है। प्रोस्टेटाइटिस के क्या कारण होते है? प्रोस्टेटाइटिस होने पर क्या लक्षण दिखाई देते है? प्रोस्टेटाइटिस के बचाव क्या है? प्रोस्टेटाइटिस का उपचार क्या होता है? ये सारे प्रश्नों के बारे मे इस ब्लॉग Prostatitis in Hindi  मे जानेगे जो, नीचे अलग-अलग सेक्शन मे लिखा गया है।

प्रोस्ट्रेट ग्रंथि मे जलन होना और सूजन आ जाता है। जिसे हम प्रोस्टेटाइटिस कहते है। प्रोस्ट्रेट ग्रंथि वीर्य का उत्पादन करती है। प्रोस्ट्रेट ग्रंथि ब्लेडर के निचले हिस्से मे पाई जाती है। ये ग्रन्थि 50 से 75 % वीर्य का निर्माण करती है। प्रोस्ट्रेट ग्रंथि का आकार उम्र के साथ बडता रहता है। जो शुक्राणुओ के पोषण मे सह्यक होता है। और यह शुक्राणुओ का परिवहन भी करता है। और प्रोस्ट्रेट ग्रंथि का आकार उम्र के साथ बडता रहता है। प्रोस्टेटाइटिस बीमारी सभी उम्र के पुरुषों मे हो सकती है। लेकिन 30 से 50 वर्ष की उम्र वाले पुरुषों मे अधिक होने की संभावना होती है। प्रोस्टेट ग्रन्थि मे सूजन आने के करना पेशाब ठीक से न हो पाना, पेशाब मे दर्द, पेशाब रुक रुक कर आना, पेशाब मे जनन, आदि समस्या होने लेगती है।

प्रोस्टेटाईटिस के प्रकार । Types of Prostatitis in Hindi:-

अगर हम प्रोस्टेटाईटिस के प्रकारों की बात करे तो इसके निम्न लिखित प्रकार होते है।

एक्यूट बैक्टीरियल प्रोस्टेटाइटिस । Acute Bacterial Prostatitis  :-

एक्यूट बैक्टीरियल प्रोस्टेटाइटिस यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन के कारण होता है। इसमे प्रोस्टेट ग्रन्थि मे सूजन आ जाती है। और ब्लेडर के निचले हिस्से मे दर्द होने लगता है। यूरिन करने मे परेसनी होने लगती है। एक्यूट बैक्टीरियल प्रोस्टेटाइटिस का उपचार लेने मे कुछ दिनों मे ठीक हो जाता है।

क्रोनिक बैक्टीरियल प्रोस्टेटाइटिस । Chronic Bacterial Prostatitis : –

क्रोनिक बैक्टीरियल प्रोस्टेटाइटिस होने पर यह बहुत दिनों तक रहता है। और गंभीर हो जाता है। इसमे इन्फेक्शन होने पेसेन्ट को दर्द का सामना करना पड़ता है। यूरिन के साथ पस आने लगता है। यूरिन करने मे परेसानी होती है। और इसका इलाज लंबे समय तक चल है। और अधिक परेसानी होने पर इसे सर्जरी द्वारा ठीक किया जाता है।

क्रोनिक पैल्विक पेन सिंड्रोम । Chronic Pelvic Pain Syndrome :-

क्रोनिक पैल्विक पेन सिंड्रोम पुरुषों मे आम होने का प्रकार है। इस प्रकार प्रोस्टेटाइटिस मे सूजन आ जाती है। इस प्रकार के प्रोस्टेटाइटिस मे पेलविक, पेरेनम, अंडकोश, मलासय मे दर्द होते रहता है। और क्रोनिक पैल्विक पेन सिंड्रोम हर 3 पुरुषों मे से 1 को होता है।  

असिम्पटोमैटिक इंफ्लेमेटरी प्रोस्टेटाइटिस । Asymptomatic Inflammatory Prostatitis :-

सिम्पटोमैटिक इंफ्लेमेटरी प्रोस्टेटाइटिस मे प्रोस्टेटाइटिस मे सूजन आ जाती है। लेकिन इसके कोई लक्षण नहीं दिखाई देते है।

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प्रोस्टेटाईटिस के कारण । Causes of Prostatitis in Hindi

प्रोस्टेटाइटिस के और भी कई कारण हो सकते हैं जैसे कि :

  • बैक्टीरियल इन्फेक्शन:- प्रोस्टेटाइटिस के कारण होता है। अगर किसी पेसेन्ट को यूरिनरी ट्रैक्ट का इन्फेक्शन है तो उसे प्रोस्टेटाइटिस होने की संभावना होती है।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी:- अगर किसी पेसेन्ट की रोग प्रतिरोधक क्षमता मे कमी है तो उस व्यक्ति जो प्रोस्टेटाइटिस होने की संभावना हो सकती है।
  • प्रोस्ट्रेट ग्रंथि में चोट लगना:- अगर किसी पेसेन्ट को किसी कारण से प्रोस्ट्रेट ग्रंथि मे चोट लग जाती है। तो प्रोस्ट्रेट ग्रंथि मे सूजन आ सकती है।
  • सेक्सुअल ट्रानमिटेड इन्फेक्शन:- सेक्सुअल एक्टिविटी के दौरान भी ये प्रोस्टेटाइटिस हो सकता है। सेक्सुअल एक्टिविटी के दौरान क्लैमाइडिया गोनोरिया के इन्फेक्शन के कारण भी प्रोस्टेटाइटिस हो सकता है।

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प्रोस्टेटाईटिस के लक्षण । Symptoms of Prostatitis Infection in Hindi:-

अगर हम प्रोस्टेटाइटिस के लक्षणों कि बात करे तो इसके प्रमुख लक्षण निम्न है-

  • पेसेन्ट को पेसाब करने मे परेसानी होने लगती है।
  • पेसेन्ट को पेशाब मे दर्द होता है।
  • पेशाब मे जलन होने लगती है।
  • पेशाब रुक रुक कर बार बार आने की शिकायत रहती है।
  • यूरिन के साथ ब्लड आना जैसी शिकायत रहती है।
  • वीर्यपात होने पर दर्द का होता है।
  • पेसेन्ट को मलाशय और अंडकोश मे दर्द रहता है।
  • लिंग दर्द होता है और अंडकोश के बीच मे दर्द होता है।
  • पेसेन्ट को पेरेनम और पेलविक एरिया मे दर्द होता है।
  • सेक्सुअल एक्टिविटी करते समय दर्द होता है।
  • पेसेन्ट को फ्लू के लक्षण रहते है।

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प्रोस्टेटाईटिस के निदान । Diagnosis of Prostatitis in Hindi

अगर हम प्रोस्टेटाइटिस के निदान की बात करे तो कुछ इस तरह से इस बीमारी का पता लगाया जाता है-

  1. शारीरिक जांच(Physical examination):- निदान के समय पेसेन्ट की शारीरिक जांच की जाएगी जो डॉक्टर प्रोस्टेटाइटिस के लक्षणों के आधार पर पेसेन्ट की शारीरिक जांच जांच की जाएगी।
  2. मेडिकल हिस्ट्री (Medical history):- निदान के समय पेसेन्ट की पुरानी मेडिकल हिस्ट्री मे बारे मे पता करेंगे। जिसमे अगर पेसेन्ट को पहले कोई बीमारी हुई है, क्या जैसे चोट, एलर्जी या कोई बीमारी।
  3. लेब टेस्ट(Lab Test):- पेसेन्ट का लेब टेस्ट किया जाएगा जो लक्षणों के आधार पर टेस्ट किट जाएगा। जिसमे पेसेन्ट का यूरिन एनालिसिस और कल्चर (यूरिनएनालिसिस), ब्लड टेस्ट, CT Scan, X ray, sonography आदि।

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प्रोस्टेटाईटिस का उपचार । Treatment of Prostatitis in Hindi:-

प्रोस्टेटाइटिस के इलाज के लिए कई दवाएं इस्तेमाल की जाती हैं। इसमें निम्नलिखित दवाएं शामिल हो सकती हैं-

  1. अल्फा-ब्लॉकर्स दवाये:- यह दवाये प्रोस्टेट ग्रन्थि की मांसपेशियों को आराम पहुचाकर मूत्र के प्रवाह को ठीक करती है।
  2. एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं:- ये दवाये सूजन को काम करती है। जिससे पेसेन्ट को मूत्र विसर्जित करने मे मदद मिलती है। और दर्द भी कम हो जाता है।
  3. एंटीबायोटिक्स:– एंटीबायोटिक्स बैक्टीरियल इन्फेक्शन को ठीक करने का कार्य करती है। बैक्टीरिया से होने वाला इन्फेक्शन जैसे क्रोनिक बैक्टीरियल प्रोस्टेटाइटिस को ठीक करने मे मदद करती है। यह दवाइया डॉक्टर द्वार पेसेन्ट को दी जाती है।
  4. सर्जरी:- सर्जरी की स्थिति तब बनती है। जब पेसेन्ट को प्रोस्टेट मे इन्फेक्शन गंभीर रूप से हो जाता है। जैसे क्रोनिक बैक्टीरियल प्रोस्टेटाइटिस जिसमे पेसेन्ट को बहुत परेसानी होने लगती है। और यह ठीक नहीं होता है। और इन्फेक्शन के कारण पस पड़ने लगता है। तो सर्जरी की जाती है। जिसमें सर्जरी के द्वारा प्रोस्टेट ग्रन्थि को हटा दिया जाता है। जिसे प्रोस्टेटैक्टोमी कहते है।

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प्रोस्टेटाईटिस की जातिलटाए । Complications of Prostatitis in Hindi

अगर हम प्रोस्टेटाईटिस के Complications की बात करे तो प्रोस्टेटाईटिस के बाद पेसेन्ट को निम्न Complications हो सकती है-

  • पेसेन्ट रक्तप्रवाह का जीवाणु संक्रमण हो सकता है।
  • पेसेन्ट को प्रोस्टेट में मवाद पड़ सकती है।
  • पेसेन्ट वीर्य संबंधी असामान्यताएं हो सकती है और बांझपन हो सकता है।
  • पेसेन्ट को ब्लाडर पे परेसानी हो सकती है।

जीवनशैली में बदलाव और घरेलू उपाय:-

जीवनशैली में बदलाव ला कर हम प्रोस्टेटाईटिस होने से बचा जा सकता है- 

  • येसा भोजन करे जिससे रोग प्रतिरोध क्षणता सामान्य बनी रहे।
  • अधिक शराब कॉफी का सेवन नहीं करे।
  • शरीर पर क्षमता से ज्यादा बल डालने वलव कार्य नहीं करे।
  • सुरक्षित सेक्सुअल एक्टिविटी ही करे।

प्रोस्टेटाईटिस के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न । Frequently asked Questions about Prostatitis in Hindi (FAQa)

प्रश्न:- प्रोस्टेट क्या है?

उत्तर:- प्रोस्ट्रेट एक ग्रन्थि होती है। प्रोस्ट्रेट ग्रंथि ब्लेडर के निचले हिस्से मे पाई जाती है। ये ग्रन्थि 50 से 75 % वीर्य का निर्माण करती है। प्रोस्ट्रेट ग्रंथि का आकार उम्र के साथ बडता रहता है। जो शुक्राणुओ के पोषण मे सह्यक होता है। और यह शुक्राणुओ का परिवहन भी करता है।

प्रश्न:- प्रोस्टेटाईटिस क्या है?

उत्तर:- प्रोस्ट्रेट ग्रंथि मे जलन और सूजन आने की स्थिति को प्रोस्टेटाईटिस कहते है। और यह बिमारी पुरुषों मे होती है। जिसमे पेशाब करते समय दर्द होता है और पेशाब मे जलन होती है, और पेशाब रुक रुक के आती है।

प्रश्न:- प्रोस्टेटाईटिस किसको हो सकता है?

उत्तर:- प्रोस्टेटाईटिस पुरुषों मे होता है और जिन पुरुषों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मे कमी है, या प्रोस्टेट ग्लैन्ड मे चोट लगी हो, सुरक्षित सेक्सुअल एक्टिविटी नहीं करते है उनको हो सकत है।

प्रश्न:- प्रोस्टेटाईटिस के लक्षण क्या है?

उत्तर:- प्रोस्टेटाईटिस होने पर कुछ इस तरह के लक्षण हो सकते है। जिसमे पेसेन्ट को पेशाब मे जलन, पेशाब मे दर्द, यूरेथ्रा मे दर्द, पेशाब के रक्त आना, लिंग मे दर्द  मलाशय और अंडकोश मे दर्द, आदि लक्षण हो सकते है।

प्रश्न:- प्रोस्टेट की जांच कैसे होती है?

उत्तर:- प्रोस्टेटाईटिस होने पर यूरिन एनालिसिस और कल्चर (यूरिनएनालिसिस), ब्लड टेस्ट, CT Scan, Xray, sonography आदि। जाचे डॉक्टर द्वारा कराई जाती है।

प्रश्न:- प्रोस्टेट बढ़ने से क्या दिक्कत होती है?

उत्तर:- प्रस्टेट बढ़ने पर पेसेन्ट को पेशाब मे जलन, पेशाब मे दर्द, यूरेथ्रा मे दर्द, पेशाब के रक्त आना, लिंग मे दर्द  मलाशय और अंडकोश मे दर्द आदि समस्याए


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