गर्भावस्था के दौरान शहद खाने के फायदे और नुकसान । Honey use During Pregnancy In Hindi

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आज हम जानेंगे शहद के बारे जिसमे क्या गर्भावस्था के दौरान शहद को खाया जा सकता है? गर्भावस्था मे शहद खाने से क्या फायदे होते है? और गर्भावस्था मे शहद खाने से क्या नुकसान हो सकते है? शहद को अपने आहार मे कैसे शामिल करे? इसे खाने से पहले किन सावधानियों को ध्यान मे रखना होता है? येसे कई सारे सवाल जो गर्भावस्था के दौरान महिलाओ के मन मे रहते है। और इनके बारे मे जानकरी नहीं हो पाने से गर्भवती महिलाये शहद नहीं खा पाती है। तो आइए जानेते है। गर्भावस्था के दौरान शहद खाने के फायदे और नुकसान के बारे जो नीचे अलग अलग सेक्सन मे लिखा गया है।

आयुर्वेद में लंबे समय से शहद को कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से राहत दिलाने के लिए उपयोग में लाया जाता रहा है। शहद कई सारी समस्याओ को ठीक करता है। शहद स्वाद मे मीठा लेकिन इसमे पोषण भरपूर मात्रा मे पाया जाता है। शहद को कई समय तक संग्रहीत करके रखा जा सकता है। यह वर्षों तक खराब नहीं होता है। क्योंकि इसमे सूक्ष्म जीव विकसित ही नहीं हो पाते है। शहद मे एंटीमाइक्रोबियल गुण पाया जाता है।

क्या शहद को गर्भावस्था मे खाया जा सकता है?

अब सवाल यह उठता है, की क्या शहद को गर्भावस्था मे खाया जा सकता है। तो जवाब है, हाँ इसे गर्भवस्था मे खाया जा सकता है। चिकित्सक इसे खाने से मना नहीं करते है। स्टाइलक्रेज के एक लेख मे कहा गया है। इसे गर्भावस्था के दौरान खाया जा सकता है। और इसके अलावा भी एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) की वेबसाइट में मौजूद एक शोध के अनुसार, शहद में एंटी बैक्टीरियल  और एंटी वाइरल गुण पाए जाते है। जो बैक्टीरिया और वाइरस से होने वाले  प्रभावो को कम करने मे सहायक होता है। जो गर्भावस्था मे होने वाले संक्रमण से राहत दिलाता है। तो आइए जानते है, गर्भावस्था में शहद खाने के फायदो के बारे जो अगले सेक्सन मे लिखे है।

गर्भवस्था में शहद खाने के फायद । Honey During Pregnancy In Hindi:-

प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाए मे मदद करे :-

गर्भावस्था के दौरान शहद का सेवन करना अच्छा माना जाता है। गर्भावस्था के दौरान शहद का सेवन करके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत किया जा सकता है। एनसीबीआई की वेबसाइट मे मोजूद एक आर्टिकल मे बताया गया है, की शहद मे एंटीऑक्सिडेंट और बैक्टीरियल गुण पाए जाते है। शहद के सेवन से एससीएफए (शार्ट-चेन फैटी एसिड) को के उत्पादन मे मदद करता है। एससीएफए (शार्ट-चेन फैटी एसिड) शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मे सुधार करके मजबूत बनाने मे मदद कर सकता है। और शोध के अनुसार ये येसा माना जाता है। महिलाओ को गर्भावस्था के दौरान शहद का सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने मे मदद मिल सकती है। जिससे रोगों से लड़ने मे सहायता मिल सकती है। क्योंकि गर्भवती महिलाओ को गर्भावस्था के इस नाजुक समय मे मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता की बहुत जरूर होती है। जिससे गर्भ मे पल रहे बच्चे पर कोई भी जटिल प्रभाव न पड़ सके।

सर्दी और खांसी मे राहत दिलाए:-

आयुर्वेद में लंबे समय से शहद को कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से राहत दिलाने के लिए उपयोग में लाया जाता रहा है। जिसमे एक उपयोग सर्दी खांसी से निजात पाने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है। शहद मे मौजूद एंटीवाइराल प्रभाव होता है। जो वाइरल इन्फेक्शन को ठीक करने मे मदद करता है। सर्दी और खांसी वाइराल इन्फेक्शन के कारण होते है। एनसीबीआई के द्वारा एक जनरल मे कहा गया है, कि छोटे बच्चों मे होने वाली सर्दी खांसी मे शहद के सेवन से राहत मिल सकती है। शहद गर्भावस्था मे वाइरल इन्फेक्शन के करने होने वाली सर्दी खांसी मे राहत दिला सकता है। लेकिन इस पर शोध करने की आवश्यकता है। एक गिलास गुनगुना पानी लें और उसमे शहद और मिला कर के इसे पीएं।

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गले के इंफेक्शन और खराश के लिए:-

अगर किसी व्यक्ति को गले मे खरास की समस्या हो गई है, जो की गले मे इन्फेक्शन होने के कारण हो सकती है। गले मे खरास से राहत दिलाने के लिए शहद का उपयोग किया जाता सकता है। क्योंकि शहद मे एंटीबैक्टीरियल और एंटीवाइराल गुण पाए जाते है। गर्भावस्था मे दवाईयो का उपयोग करना बहुत ही नुकसानदायक हो सकता है। शहद को एंटीबायोटिक दवाओ का सबसे सस्ता विकल्प माना जाता है। इसे गर्भावस्था मे अगर किसी महिला को गले मे खरास की सिकायत है तो शहद के सेवन को दूर किया जा सकता है।

अच्छी नींद के लिए:-

गर्भावस्था के दौरान गर्भवतियों महिलाओ को तनाव और अन्य समस्याओ का सामना करना पड़ता है। जिस कारण महिलाये सो नहीं पाती है। एनसीबीआई कहा गया है। की शहद मे हिप्नोटिक नामक प्रभाव पाया जाता है। जो अनिंद्रा की समस्या को दूर करने मे सहायक होता है। गर्भावस्था के दौरान तनाव और अनिद्रा से पीड़ित महिलाओं के लिए शहद का सेवन करना विशेष रूप से उपयोगी है। यह नींद की गुणवता मे सुधार लाता है। रात को सोने से पहले गर्म दूध के गिलास में एक चम्मच शहद मिला कर पीएं।

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एलर्जी संबंधी समस्याओं के लिए:-

आयुर्वेद के एक लेख मे लिखा गया है, की शहद का उपयोग एलर्जी संबंधी समस्याए जैसे नाक से पानी बहना, स्किन पे चकते बन जाना, स्किन पे खुजली होना, आदि समस्याओ मे राहत पाने के लिए शहद का उपयोग किया जा सकता है। क्योंकि शहद में एंटीएलर्जीक (एलर्जी को दूर करने वाला) गुण पाए जाते है। शहद मे उपस्थित पोलेन एलर्जीक प्रतिक्रियाओ मे सुधार लाने मे मददगार होता है। गर्भावस्था मे एलर्जी के कारण स्किन पे खुजली और स्किन रेसेस को ठीक किया जा सकता है। एलर्जी मे शहद कितना मददगार है, इस पर अभी शोध की आवश्यकता है।

अल्सर का उपचार करे:-

अध्ययन के अनुसार शहद में मौजूद एंटी बैक्टीरियल गुण पाया जाता है। जो हेलिकोबैक्टर पाइलोरी बैक्टीरिया कारण होने वाले जठरशोथ (गैस्ट्राइटिस) , पेप्टिक अल्सर के प्रभावों को कुछ हद तक ठीक करने मे मददगार होता है। गर्भावस्था मे गर्भवती महिलाओ को पेट मे गेस होना आम बात होती है। लेकिन गर्भवती महिलाये गेस और गेस्ट्रिक अल्सर से राहत पाने के लिए शहद का सेवन कर सकती है।

ऊर्जा का अच्छा स्रोत:-

गर्भावस्था मे महिलाओ को थकान और कमजोरी का सामना करना पड़ता है। शहद आयरन, विटामिन बी और विटामिन सी और कैल्शियम का अच्छा स्रोत भी है। शहद थकान और कमजोरी को दूर करने मे भी मदद करता है।

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गर्भावस्था में शहद को अपने आहार में कैसे शामिल करें:-

गर्भवती महलाओ के लिए चिंता का विषय बन जाता है, की शहद का इस्तेमाल की कैसे किया जाता है। इस कारण से भी कुछ महिलाये शहद का उपयोग नहीं कर पाती है।  इसलिए आइए जानते है। गर्भावस्था मे शहद को अपने आहार मे कैसे शामिल करे।

  • पानी को गुनगुना करके उसमे शहद को मिलाकर पी सकते हैं।
  • गर्भवती महिलाये चाहे तो शहद को सीधे भी खाया जा सकता है।
  • शहद को रोटी मे लगाकर भी खाया जा सकता है।
  • गर्म दूध के साथ शहद मिलाकर पी सकते हैं।
  • ओट्स में शहद मिलाकर खाया जा सकता है।

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गर्भावस्था में शहद खाने के नुकसान । Side Effects of Eating Honey While Pregnant In Hindi

गर्भावस्था में शहद खाने के फायदे होते हैं, लेकिन शहद कुछ नुकसान भी हो सकते हैं। क्या हैं गर्भवती महलाओ को शहद खाने के क्या नुकसान होते है, हम इस सेक्सन पड़ेंगे-

  • अगर किसी गर्भवती महिला को मधुमेह (डायबिटीज) की शिकायत है। तो उस महिला को शहद नहीं खाने की सलाह दी जाती है। क्योंकि मधुमेह (डायबिटीज) मे शहद खाने से शुगर का लेवल बड़ सकता है।
  • गर्भवती महिलाओ को गैस, पेट फूलने जैसी समस्या हो सकती है। क्योंकि इसमे फ्रुक्टोज मौजूद होता है। गैस, पेट फूलने जैसी समस्ये उत्पन्न कर सकता है।
  • ज्यादा शहद खाने से दांतों में सड़न हो सकती है।
  • कुछ दवाओं के साथ सेवन करने से उसके साइड इफेक्टस मे व्रदधी हो सकती है।
  • ब्लड क्लॉटिंग की दवाओं के साथ शहद का सेवन करने से रक्तस्राव का खतरा रहता है।

आज हमने इस ब्लॉग Kumar Medical Care मे जाना गर्भावस्था के दौरान शहद खाने के फायदे और नुकसान के बारे। और शहद को कैसे अपने आहार मे शामिल किया जाता है । इसके बारे, आसा करता हूँ की आपको इस आर्टिकल से जानकरी मिली होगी। और आपको अगर ये पोस्ट अच्छी लगी होगी। इस पोस्ट को अपने दोस्तों को भी शेयर करे और आपको कोई सवाल है, तो नीचे कॉमेंट मे जरूर से लिखे।

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